UPAT न्यूज़ डेस्क:- शिक्षा मंत्रालय ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित को नया कुलपति नियुक्त किया है. वह संस्था की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला होंगी. बता दें कि उनकी नियुक्ति की घोषणा के तुरंत बाद, सोशल मीडिया पर उनके नाम के एक ट्विटर हैंडल(@SantishreeD) से किये गये पुराने विवादास्पद ट्वीट्स को लेकर अब हंगामा मचा हुआ है.
दरअसल इन ट्वीट्स में जामिया मिलिया इस्लामिया और सेंट स्टीफंस कॉलेज को “सांप्रदायिक परिसर” कहा गया था. इस हैंडल के जरिए भारतीय ईसाइयों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को “मानसिक रूप से बीमार जिहादी” के रूप में बताया था. हालांकि जब इसको लेकर बवाल बढ़ा तो इसे डिलीट कर दिया गया.
बीजेपी सांसद ने प्रेस रिलीज को लेकर नियुक्ति पर उठाये सवाल :-बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने जेएनयू की नई कुलपति की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज़ पर चुटकी ली है. ट्वीट करके वरुण गांधी ने कहा है कि नई जेएनयू वीसी की ये प्रेस विज्ञप्ति अशिक्षा की एक प्रदर्शनी है. उन्होंने कहा कि इस प्रेस रिलीज़ में व्याकरण संबंधी कई ग़लतियाँ हैं. उन्होंने विस्तार से बताया है कि प्रेस रिलीज़ में क्या-क्या ग़लतियाँ हैं. नई वीसी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा है कि इस तरह की औसत नियुक्तियाँ हमारे युवाओं के भविष्य को नुक़सान पहुँचाती हैं.
एक दिन पहले ही शिक्षा मंत्रालय ने शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित को जेएनयू का नया वीसी नियुक्त किया है. वीसी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में अपनी नियुक्ति के लिए पीएम मोदी और शिक्षा मंत्रालय का आभार जताया है. शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित जेएनयू की पहली महिला कुलपति हैं. हालाँकि उनकी नियुक्ति को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं. स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने उनके पुराने ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट लगाकर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं.
बता दें कि शांतिश्री धूलिपुडी पंडित एम जगदीश कुमार की जगह लेंगी. जो हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष बने हैं. उनका नियुक्ति आदेश 4 फरवरी को जारी किया गया था और यह पांच साल की अवधि के लिए वैध है. सोमवार को एक बयान में पंडित ने कहा कि उनका ध्यान “अकादमिक उत्कृष्टता के लिए स्वच्छ प्रशासन, छात्रों के अनुकूल वातावरण” प्रदान करना होगा.
वहीं उनकी नियुक्ति पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. जानकारी के मुताबिक कथित रूप से दो बार उनकी वेतन में वृद्धि रोकी गई थी. कहा जा रहा है कि इस खुलासे के बाद भी उनकी नियुक्ति की गई. वहीं MoU की एक रिपोर्ट के मुताबिक सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय ने बताया कि अधिकारियों ने 1 जुलाई, 2011 से पंडित की पांच वेतन वृद्धि और 1 जुलाई, 2017 से अन्य दो वेतन वृद्धि को स्थायी रूप से रोकने का जुर्माना लगाया था.
नियुक्ति पर सीपीआई (एमएल) की नेता कविता कृष्णन ने उठाये सवाल:-
ट्विटर पर सीपीआई (एमएल) की नेता कविता कृष्णन ने लिखा कि मोदी सरकार में जेएनयू की नई वीसी ने भारत के किसानों के खिलाफ और हिंदू-वर्चस्ववादी विचारों से भरे कई ट्वीट्स किये हैं. उन्होंने लिखा कि पंडित सक्रिय रूप से जेएनयू से घृणा करती हैं.
कृष्णन के ट्वीट के मुताबिक विवादित ट्वीट्स में कहा था कि जेएनयू से हारने वालों ने अपना नियंत्रण खो दिया है. इन चरमपंथी नक्सल समूहों को जेएनयू परिसर से प्रतिबंधित किया जाये. जामिया और सेंट स्टीफंस जैसे सांप्रदायिक परिसरों को वित्त रोका जाये
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