UPAT न्यूज़ डेस्क:- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी शैक्षणिक संस्थानों और राज्य सरकारों को डिजी लाकर से जुड़ने का न्योता दिया है. ताकि शैक्षणिक दस्तावेज के साथ होने वाली छेड़छाड़ और उनकी जांच पड़ताल से बचा जा सके. साथ ही इस पर उपलब्ध डिग्री, मार्कशीट सहित दूसरे दस्तावेज को वैध मानने को भी कहा है. रिपोर्ट के मुताबिक डिजी लाकर पर मौजूदा समय में 40 करोड़ से ज्यादा शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध हैं जो उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा दोनों से जुड़े हैं.
यूजीसी की यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि अभी भी बड़ी संख्या में संस्थान डिजी लाकर नेशनल अकेडमिक डिपाजिटरी (एनएडी) से नहीं जुड़े हैं, जबकि इसकी स्थापना ही शैक्षणिक संस्थानों के लिए की गई है. कुछ संस्थानों में डिजी लाकर की ओर से मुहैया कराए जाने वाले दस्तावेज की प्रमाणिकता पर भी संहेद जताया जा रहा है और उनकी जांच पड़ताल के लिए पुरानी प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
डिजिटलीकरण पर जोर
इसमें ज्यादा समय तो लगता ही है सरकार का वह उद्देश्य भी प्रभावित होती है जिसमें डिजिटलीकरण और आनलाइन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी उद्देश्य के लिए सरकार ने हाल ही में पेश बजट में देश में एक डिजिटल यूनिवर्सिटी भी खोलने का एलान किया है.
डिजी लाकर पर मौजूद दस्तावेज पूरी तरह से वैध
देशभर के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के निदेशकों सहित सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूली और उच्च शिक्षा सचिवों को लिखे पत्र में यूजीसी ने कहा है कि डिजी लाकर पर मौजूद सभी शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह से वैध हैं, क्योंकि शैक्षणिक संस्थानों की ओर से ही सीधे एनएडी पर ये अपलोड किए जाते हैं. ऐसे में डिजी लाकर खाते में उपलब्ध दस्तावेज को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करें.
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